वृक्षासन क्या है? इसके करने की विधि, उपाय, फायदे और करने के दौरान रखने वाली सावधानियां

वृक्षासन :

वृक्षासन संस्कृत भाषा का शब्द है। इसका शाब्दिक अर्थ होता है, वृक्ष यानी कि पेड़ जैसा आसन। इस आसन में योगी का शरीर पेड़ की स्थिति बनाता है और वैसी ही गंभीरता और विशालता को खुद में समाने की कोशिश करता है।

वृक्षासन का नियमित अभ्यास आपके शरीर को नई चेतना और ऊर्जा हासिल करने में मदद करता है। आमतौर पर योगासन करने के दौरान आपको आंखें बंद करके ऊर्जा का अनुभव करने की सलाह दी जाती है।

लेकिन वृक्षासन के दौरान आपसे आंखें खुली रखने के लिए कहा जाता है। ऐसा इसलिए ताकि आप शरीर का संतुलन करने के साथ ही आसपास की गतिविधियों को देखते हुए खुद को स्थिर बनाए रखने की प्रेरणा हासिल कर सकें।

वृक्षासन हठयोग का शुरुआती लेवल का आसन है। इस आसन को करते समय एक टांग पर सिर्फ एक मिनट तक ही खड़े रहने की सलाह दी जाती है। इसके बाद ये आसन दूसरी टांग पर करना चाहिए। हर टांग पर कम से कम 5 बार ये आसन करना चाहिए।

वृक्षासन के नियमित अभ्यास से टखने, जांघें, पिंडली, पसलियां मजबूत हो जाती हैं। जबकि ग्रोइन, जांघें, कंधे और छाती पर खिंचाव पड़ता है।

वृक्षासन करने के फायदे :

वृक्षासन शरीर को संतुलित करने वाला आसन है। इसके मुख्य फायदे बैलेंस बनाने और नर्व्स सिस्टम को बढ़ाने में छिपे हुए हैं।

जब आप शरीर का संतुलन बनाते हैं तो, आप दिमाग को फोकस करने के लिए मजबूर करते हैं और जब आप फोकस करते हैं तो आपको ये महसूस होने लगता है कि आप संतुलन बना पा रहे हैं। जब दिमाग इस तथ्य को जान लेता है तो वह शरीर को भी वैसे ही संकेत भेजने लगता है। इसकी वजह से आप धीमी गति से ही सही लेकिन स्ट्रेस और टेंशन की स्थिति में भी बैलेंस बनाने की कला सीख लेते हैं।

इसके अलावा वृक्षासन के दौरान आप अपने दिमाग और शरीर को भी स्ट्रेचिंग के जरिए स्थिर कर रहे होते हैं। ये आसन आपके जोड़ों और हड्डियों को मजबूत करता है। इसके अलावा ये हिप्स और चेस्ट के हिस्से को फैलाने में भी मदद करता है। ये आपके कंधों के मूवमेंट को फ्री करता है और हाथों को टोन करने में भी मदद करता है।

इसके अलावा भी वृक्षासन का अभ्यास करने के ढेरों फायदे हैं। जैसे,

● वृक्षासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है।

● ये शरीर में स्थिरता और संतुलन बनाने में मदद करता है।

● ये न्यूरो-मस्क्युलर के बीच संबंध को मजबूत और स्वस्थ बनाता है।

● वृक्षासन पैरों की मसल्स को टोन करता है।

● ये पैरों के लिगामेंट और टेंडोंस को मजबूत बनाता है।

● घुटने मजबूत होते हैं और हिप्स के जोड़ ढीले होते हैं।

● आंखें, भीतरी कान और कंधे भी मजबूत होते हैं।

● साइटिका के दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है।

● ये फ्लैट फीट की समस्या से भी राहत दिलवाता है।

● ये आपको स्थिर, लचीला और धैर्यवान बनाता है।

● वृक्षासन एकाग्रता को बढ़ाता है और मानसिक उलझनों को दूर करता है।

● ये आसन छाती की चौड़ाई बढ़ाने में भी मदद करता है।

वृक्षासन करने का सही तरीका :

शुरुआत में आपको वृक्षासन करने में परेशानी हो सकती है। क्योंकि आपको अपने बाएं पैर को दाएं घुटने से ऊपर रखना पड़ता है। ऐसी स्थिति में, आप अपने पैर को घुटने के नीचे रख सकते हैं।

लेकिन, कभी भी पैर को अपने घुटने पर मत रखिए। इसके अलावा आपके लिए स्थिर खड़े रहना और संतुलन बनाए रखना भी ​कठिन महसूस हो सकता है। इसलिए शुरुआती दौर में इस आसन का अभ्यास करने में असुविधा होने पर आप संतुलन बनाने के लिए दीवार का सहारा ले सकते हैं।

इसके अलावा एकाग्रता को बढ़ाने के लिए आप वृक्षासन की प्रैक्टिस से पहले कुछ लंबी सांसें ले सकते हैं और अपने सामने स्थित किसी वस्तु पर एकटक निगाह बनाए रखकर आप अपने को संतुलित और स्थिर बनाए रख सकते हैं।

वृक्षासन करने की विधि :

  1. योग मैट पर सावधान की मुद्रा में सीधे खड़े हो जाएं।
  2. दोनों हाथ को जांघों के पास ले आएं।
  3. धीरे-धीरे दाएं घुटने को मोड़ते हुए उसे बायीं जांघ पर रखें।
  4. बाएं पैर को इस दौरान मजबूती से जमीन पर जमाए रखें।
  5. बाएं पैर को एकदम सीधा रखें और सांसों की गति को सामान्य करें।
  6. धीरे से सांस खींचते हुए दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठाएं।
  7. दोनों हाथों को ऊपर ले जाकर ‘नमस्कार’ की मुद्रा बनाएं।
  8. दूर रखी किसी वस्तु पर नजर गड़ाए रखें और संतुलन बनाए रखें।
  9. रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। शरीर मजबूत के साथ ही लचीला भी रहेगा।
  10. गहरी सांसें भीतर की ओर खींचते रहें।
  11. सांसें छोड़ते हुए शरीर को ढीला छोड़ दें।
  12. धीरे-धीरे हाथों को नीचे की तरफ लेकर आएं।
  13. अब दायीं टांग को भी जमीन पर लगाएं।
  14. वैसे ही खड़े हो जाएं जैसे आप आसन से पहले खड़े थे।
  15. इसी प्रक्रिया को अब बाएं पैर के साथ भी दोहराएं।

वृक्षासन करने में क्या सावधानी बरती जाए :

वृक्षासन का अभ्यास करने के दौरान आपको ध्यान रखना चाहिए कि उठे हुए पैर का तलुआ खड़े पैर के घुटने से या तो ऊपर रहे या फिर नीचे रहे। कोशिश करें कि ऊपर ही रहे। कई बार लोग ये गलती कर देते हैं कि आसन का अभ्यास करते समय पैर को घुटने पर ही रख लेते हैं। इससे घुटने पर अनावश्यक जोर पड़ता है और असंतुलन की संभावना भी बढ़ जाती है।

इसके अलावा, आपको निम्नलिखित समस्याएं हैं तो वृक्षासन का अभ्यास करने से बचें।

● हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को वृक्षासन करते हुए हाथों को ऊपर की तरफ नहीं उठाना चाहिए। वे हाथों को सीने पर या ‘अंजलि मुद्रा’ में भी रख सकते हैं।

● इंसोम्निया के मरीज वृक्षासन का अभ्यास न करें।

● माइग्रेन की समस्या होने पर भी वृक्षासन नहीं करना चाहिए।

● शुरुआत में वृक्षासन को योग ट्रेनर की देखरेख में ही करें।

● संतुलन बनने पर आप खुद भी ये आसन कर सकते हैं।

● वृक्षासन का अभ्यास शुरू करने से पहले हमेशा डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

वृक्षासन करने से पहले ये आसन करें :
● त्रिकोणासन (Trikonasana)

● वीरभद्रासन 2 (Virabhadrasana II)

● बद्ध कोणासन (Baddha Koṇasana)

वृक्षासन करने के बाद ये आसन करें:
● खड़े होकर किए जाने वाले योगासन

निष्कर्ष (Conclusion) :
वृक्षासन, योग विज्ञान का बहुत अच्छा आसन है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन रहता है। वृक्षासन न सिर्फ मेटाबॉलिज्म को एक्टिवेट करता है बल्कि आपके दिमाग को स्थिर रखने में भी मदद करता है। और आज की दुनिया में बैलेंस बनाकर रखना ही सबसे जरूरी चीज है। वृक्षासन बैलेंस बनाने से जुड़ी इसी खूबी को आपके शरीर में विकसित करने में मदद करता है।

वृक्षासन का अभ्यास करने के लिए आपके पैर और क्वा​ड्रीसेप्स इतने मजबूत होने चाहिए कि पूरे शरीर का वजन उठा सकें। लेकिन सबसे पहले आपको अपने मन के डर पर जीत हासिल करनी होगी कि कहीं आप अभ्यास करते हुए गिर न पड़ें।

अगर गिर भी जाएं तो गहरी सांस लें और कोशिश के लिए अपनी तारीफ करें और दोबारा अभ्यास करें। शुरुआती दौर में इस आसन को करने के लिए किसी योग्य योग शिक्षक से मार्गदर्शन जरूर लें।

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