स्पर्शचिकित्सा क्या है, इसके क्या फायदे हैं… कैसे करता है प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत

क्या है स्पर्श चिकित्सा


रोगी के शरीर को छूकर जो स्पर्श क्रिया की जाती है उसका भी विचित्र प्रभाव होता है।। इस प्रणाली को मनुष्य जाति चिरकाल से जानती आ रही है।। प्रमुख लेखक अल्पिनी ने लिखा है कि मिश्र के पुरोहित लोग एक विशेष प्रकार की रहस्यमय मालिश करके कठिन रोगों को दूर कर देते थे।। प्राचीनकाल के ख्यातिनामा चिकित्सक हिपोक्रेट ने मालिश द्वारा ही अनेक रोगी अच्छे किए थे।। क्रेशस नामक एक उपचारक इस क्रिया को बहुत महत्व देता था।। उसने अपनी पुस्तक में तर्क और प्रमाणों सहित मालिश की उपयोगिता सिद्ध की है

ट्रालिस का अलक्षेन्द्र नामक एक यूनानी चिकित्सक रहस्यमय मालिश करने में कुशल था और सब बीमारियों में इसका उपयोग करता था फ्रांस के तेरहवें लुई के राजवैद्य पीटर ने राजसभा में ही खड़े खड़े कुछ भयंकर रोगियों को अच्छा कर दिया था।। आजकल भी पैरों को दबाना, सिर की मालिश करवाना,, देह में तेल लगवाना,, तलवों की मालिश आदि का सब जगह प्रचार है।। इन्हें करवाने के बाद लोग आराम महसूस करते हैं।। पेट दर्द में उदर पर हाथ फिराने और सिरदर्द होने पर सिर दबाने का महत्व गाँवों के अशिक्षित स्त्री-पुरुष भी जानते है

मालिश द्वारा संजीवनी बल प्रेरित करने के लिए जोर जोर से दबाने की जरूरत नहीं है बल्कि हाथ हलका,, सुख कर और कंपन के साथ चलना चाहिए।। औपचारिक मालिश में हथेली का पिछला भाग और उँगलियों का अधिक प्रयोग होना चाहिए।

कैसे किया जाता है
दोनों हाथ की हथेलियों को आपस में रगड़ कर गरम करते हैं और एक या दोनों को पीड़ित स्थानपर रख देते हैं।। 3 मिनट बाद फिर उन्हें रगड़ते हैं और उसी प्रकार रख देते हैं।। इस तरह कई बार करने से बहुत लाभ होता है।। सिर दर्द और आँखें दुखने की दशा में यह प्रयोग विशेष लाभप्रद है,चारों उँगलियों के छोर एक सीध में करो,, चूंकि उँगलियाँ छोटी बड़ी होती हैं इसलिए बड़ी को कुछ झुकाकर और छोटी को सीधी रखकर उनके छोर एक सीध में लाए जा सकते हैं।। इस प्रकार चारों उँगलियों को एक सीध में लेकर उन्हें रोगी के दुखी अंग का संपूर्ण शरीर पर बहुत हलका स्पर्श करते हुए फिराना चाहिए यदि उन्हें समस्त शरीर पर यह स्पर्श करना है तो एक साथ हीपूरे शरीर पर मत करो वरन् एक बार सिर से पेट तक और दूसरी बात पेट से पावों तक करो।। छाती और पेट का विशेष रूप से ध्यान रखो क्योंकि पोषण रस यहीं से पैदा होते हैं


 पूरे हाथ से पीड़ित अंगों को लगातार और क्रम के अनुसार स्पर्श करना एक प्रकार की मालिश है।। इससे चुंबक प्रभाव एक शरीर से दूसरे शरीर में जाकर मदद करता है।

कई चिकित्सकों के मत से वर्तल स्पर्श नामक एक और विधि बहुत उपयुक्त है।। इसमें पीड़ित स्थान पर हाथ और उँगलियों को गोलाकार घुमाते हैं।। घड़ी की सुई की तरह हाथ दाहिनी ओर से फेरना चाहिए बाँई ओर से कदापि नहीं।

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कैसे बढ़ता है रक्त संचार

मांसपेशियों और नाड़ियों के जकड़ जाने की दशा में गूँदने की मालिश बहुत लाभदायक रहती है।आटे को जिस तरह से गूँथते हैं उसी प्रकार रुग्ण भाग को उँगलियों से क्रमबद्ध गति से दबाते हैं

चिकोटी काटना उत्तेजक उपाय है। यह रक्त संचार को बढ़ा देती है।। तर्जनी और अँगूठे से आध इंच चमड़ी की चिकोटी भरनी चाहिए और फिर उसे छोड़ कर दूसरे स्थान पर भरनी चाहिए।। इस प्रकार दोनो हाथों से जल्दी जल्दी पीड़ित भाग को गोलाकार चिकोटी भरनी चाहिए


रगड़ने और घिसने की मालिश उन अंगों पर की जाती है जो बहुत ही निर्बल और क्षीण हो गए हों।। चारों उंगलियों का निचला भाग दुखी अंग पर तब तक रगड़ ते हैं जब तक कि वह खूब गरम न हो जाए।


बार बार पीटना प्रहार की पद्धति है।। हाथ को गँड़ासे की तरह बनाओ।। कुट्टी कुटने में गँड़ासे की धार को जिस तरह मारते हैं उसी प्रकार हाथ के निचले भाग से लम्बी लम्बी थपकी मारो।। तलवार या छुरी जिस तरह से किसी को काटते हैं उसी प्रकार हाथ के निचले भाग की क्रिया होती है।। उँगलियाँ मिलाकर हाथ खुला रखा जाता है और छोटी उँगली की ओर से प्रहार किया जाता है।
थप्पड़ और चाँटा मारना सब जानते हैं।

तुमने किसी को कभी चाँटा जरूर मारा होगा। ठीक उसी प्रकार यह क्रिया भी होती है, फरक इतना ही है कि यह चाँटे हलके,, सुखकर होते हैं और एक नियत गति से एक ही स्थान पर बहुत देर तक लगाए जाते हैं

ताली बजाना भी है फायदेमंद
खोखली ताली बजाने का अभ्यास हर कोई थोड़े अभ्यास के बाद आसानी से कर सकता है।। सरकस में नट लोग मनोरंजन के लिए जिस तरह पोले हाथ का चाँटा मारकर खोखली आवाज चटकाते हैं उसी तरह यह थपकियाँ होती है। हथेली के बीच का भाग उठा हुआ और पोली रखते हैं।। उँगलियाँ और हथेली की जड़ का ही प्रयोग होता है।। इस प्रकार की थपकियाँ भी बीमार को दी जाती हैं

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