पोषक तत्वों से भरपूर खजूर जानिए किन किन रोगों में लाभदायक सिद्ध होता है खजूर

जानिए खजूर के गुण

पोषक तत्वों से भरपूर खजूर

आजमा कर देखें.!

खजूर में 60 से 70℅ तक शर्करा होती है, जो गन्ने की चीनी की अपेक्षा बहुत पौष्टिक व गुणकारी वस्तु है।

खाने में तो खजूर बहुत स्वादिष्ट होती ही है, सेहत की दृष्टि से भी यह बहुत गुणकारी है।

इसके अलावा विभिन्न बीमारियों में भी खजूर का सेवन बहुत लाभ पहुंचाता है।

खजूर के गुणों से भरपूर:

खजूर मधुर, तर, गर्म, पौष्टिक व सेवन करने के बाद तुरंत शक्ति-स्फूर्ति देनेवाला है।

यह रक्त, मांस व वीर्य की वृद्धि करता है।

ह्रदय व मस्तिष्क को शक्ति देता है।

वात, पित्त व कफ इन तीनों दोषों का शामक है।

यह मल व मूत्र को साफ लाता है।

खजूर में कार्बोहाइड्रेटस, प्रोटीन्स, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नेशियम, लौह आदि प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

‘अमेरिकन कैंसर सोसाइटी’ के अनुसार शरीर को एक दिन में 100  में 317 कैलोरी,

75 g कार्ब्स,

120 मिलीग्राम कैल्शियम,

20-35 ग्राम डाएटरी फाइबर (खाद्य पदार्थों में स्थित रेशा) की जरुरत होती है, जो खजूर खाने से ही पूरी हो जाती है।

खजूर रात भर पानी में भिगोकर सुबह लेना लाभदायक है।

खजूर रक्त को बढ़ाता है और यकृत (लीवर) के रोगों में लाभकारी है।

रक्ताल्पता में इसका नियमित सेवन लाभकारी है।

नींबू के रस में खजूर की चटनी बनाकर खाने से भोजन की अरुचि मिटती है।

खजूर का सेवन बालों को लंबा, घना और मुलायम बनाता है।

औषधीय प्रयोग

कब्जनाशक :

खजूर में रेचक गुण भरपूर है।

8-10 खजूर 100 ग्राम पानी में भिगों दें, सुबह मसलकर इनका शरबत बना लें।

फिर इसमें 300 ग्राम पानी और डालकर गुनगुना गर्म करें।

खाली पेट चाय की की तरह पी जायें।

कुछ देर बाद दस्त होगा।

इससे आँतों को बल और शरीर को स्फूर्ति भी मिलेगी।

उम्र के अनुसार खजूर की मात्रा कम-ज्यादा करें।

नशा निवारक :

शराबी प्राय: नशे की झोंक में इतनी शराब पी जाता है कि उसका यकृत नष्ट होकर मृत्यु का कारण बन सकता है।

इस स्थिति में ताजे पानी में खजूर को अच्छी तरह मसलते हुए शरबत बनायें।

यह शरबत पीने से शराब का विषैला प्रभाव नष्ट होने लगता है।

आँतों की पुष्टि

खजूर आँतों के हनिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है, साथ ही खजूर के विशिष्ट तत्त्व ऐसे जीवाणुओं को जन्म देते हैं जो आँतों को विशेष शक्तिशाली तथा अधिक सक्रिय बनाते हैं।

हृदय रोगों में :

लगभग 50 ग्राम गुठली रहित छुहारे (खारक) 250 ml पानी में रात को भिगो दें।

सुबह छुहारों को पीसकर पेस्ट बना के उसी बचे हुए पानी में घोल लें।

इसे प्रात: खाली पेट पी जाने से कुछ ही माह में ह्रदय को पर्याप्त सबलता मिलती है।

इसमें 1 ग्राम इलायची चूर्ण मिलाना विशेष लाभदायी है।

तन-मन की पुष्टि :

बच्चों को दूध में खजूर उबाल के देने से उन्हें शारीरिक एवं मानसिक पोषण मिलता है व शरीर सुदृढ़ बनता है।

शैयामूत्र :

जो बच्चे रात्रि में बिस्तर गीला करते हों, उन्हें दो छुहारे रात्रि में भिगोकर सुबह दूध में उबाल के दें।

बच्चों के दस्त में :

बच्चों के दाँत निकलते समय उन्हें बार बार गारे दस्त होते हों या पेचिश पड़ती हो तो खजूर के साथ शहद को अच्छी तरह फेंटकर एक-एक चमच दिन में 2-3 बार चटाने से लाभ होता है।

मस्तिष्क व हृदय की कमजोरीः

रात को खजूर भिगोकर सुबह दूध या घी के साथ खाने से मस्तिष्क व हृदय की पेशियों को ताकत मिलती है। विशेषतः रक्त की कमी के कारण होने वाली हृदय की धड़कन व एकाग्रता की कमी में यह प्रयोग लाभदायी है।

 मलावरोधः

रात को भिगोकर सुबह दूध के साथ लेने से पेट साफ हो जाता है।

कृशताः

खजूर में शर्करा, वसा (फैट) व प्रोटीन्स विपुल मात्रा में पाये जाते हैं। इसके नियमित सेवन से मांस की वृद्धि होकर शरीर पुष्ट हो जाता है।

रक्ताल्पताः

खजूर रक्त को बढ़ाकर त्वचा में निखार लाता  गाय के घी। इसके अतिरिक्त अधिक मासिक स्राव, क्षयरोग, खाँसी, भ्रम(चक्कर), कमर व हाथ पैरों का दर्द एवं सुन्नता तथा थायराइड संबंधी रोगों में भी यह लाभदायी है।

कमजोरी :

खजूर 200 ग्राम,

चिलगोजा गिरी 60 ग्राम,

बादाम गिरी 60 ग्राम,

काले चनों का चूर्ण 240 ग्राम,

गाय का घी 500 ग्राम,

दूध दो लीटर और 

चीनी या गुड़ 500 ग्राम।

इन सबका पाक बनाकर 50 ग्राम प्रतिदिन गाय के दूध के साथ खाने से हर प्रकार की शारीरिक वं मानसिक कमजोरी दूर होती है।

बिस्तर पर पेशाब :

छुहारे खाने से पेशाब का रोग दूर होता है।

बुढ़ापे में पेशाब बार बार आता हो तो दिन में दो छुहारे खाने से लाभ होगा।

छुहारे वाला दूध भी लाभकारी है।

यदि बच्चा बिस्तर पर पेशाब करता हो तो उसे भी रात को छुहारे वाला दूध पिलाएं। यह मसानों को शक्ति पहुंचाते हैं।

मासिकधर्म :

छुहारे खाने से मासिक धर्म खुलकर आता है और कमर दर्द में भी लाभ होता है।

दांतों का गलना :

छुहारे खाकर गर्म दूध पीने से कैलशियम की कमी से होने वाले रोग, जैसे दांतों की कमजोरी, हड्डियों का गलना इत्यादि रूक जाते हैं।

रक्तचाप :

कम रक्तचाप वाले रोगी 3-4 खजूर गर्म पानी में धोकर गुठली निकाल दें।

इन्हें गाय के गर्म दूध के साथ उबाल लें।

उबले हुए दूध को सुबह-शाम पीएं।

कुछ ही दिनों में कम रक्तचाप से छुटकारा मिल जायेगी।

कब्ज :

सुबह-शाम तीन छुहारे खाकर बाद में गर्म पानी पीने से कब्ज दूर होती है।

खजूर का अचार भोजन के साथ खाया जाए तो अजीर्ण रोग नहीं होता तथा मुंह का स्वाद भी ठीक रहता है।

खजूर का अचार बनाने की विधि…

थोड़ी कठिन है, इसलिए बना बनाया अचार ही ले लेना चाहिए।

मधुमेह :

मधुमेह के रोगी जिनके लिए मिठाई, चीनी इत्यादि वर्जित है, सीमित मात्रा में खजूर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

खजूर में वह अवगुण नहीं है, जो गन्ने वाली चीनी में पाए जाते हैं।

पुराने घाव :

पुराने घावों के लिए खजूर की गुठली को जलाकर भस्म बना लें।

घावों पर इस भस्म को लगाने से घाव भर जाते हैं।

आंखों के रोग :

खजूर की गुठली का सुरमा आंखों में डालने से आंखों के रोग दूर होते हैं।

खांसी :

छुहारे को घी में भूनकर दिन में 2-3 बार सेवन करने से खांसी और बलगम में राहत मिलती है।

जुएं :

खजूर की गुठली को पानी में घिसकर सिर पर लगाने से सिर की जुएं मर जाती हैं।

प्रयोग :

भिगोकर, चटनी, लड्डू, दूध में उबालकर, गर्मियों में पानी मे भिगोकर!

सावधानी

आजकल खजूर को वृक्ष से अलग करने के बाद रासायनिक पदार्थों के द्वारा सुखाया जाता है।

ये रसायन शरीर के लिए हानिकारक होते है।

अत: उपयोग करने से पहले खजूर को अच्छी तरह से धों लें।

धोकर सुखाने के बाद इन्हें विभिन्न प्रकार से उपयोग किया जा सकता है।

 होली के बाद खजूर खाना हितकारी नहीं है।

डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति खजूर उचित मात्रा में करें।